Chhatarpur: छतरपुर में दिखी आस्था संग कला, बच्चों ने सीखे इको-फ्रेंडली गणेश जी बनाना

गणेश चतुर्थी 2025 -धर्म और पर्यावरण का संगम एक साथ कम देखने को मिलता है. लेकिन छतरपुर के संकट मोचन मंदिर परिसर में यह देखने को मिला, तक जब बुन्देलखंड के अंतर्राष्ट्रीय मूर्ति कलाकार दिनेश शर्मा ने छतरपुर के बच्चों को मिट्टी के गणेश बनाना दिखाए ओर पर्यावरण को बचाने का तरीका भी बताया. बच्चे अपने हाथों से बनाई गणेश प्रतिमाओं को अपने घर ले गए और गणेश उत्सव पर विराजमान कर पूजा अर्चना करेंगे.

गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां पूरी

छतरपुर जिले में गणेश उत्सव की तैयारियां पिछले डेढ़ माह पहले से ही शुरू हो गई थीं. अब मूर्तिकारों ने प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप दे दिया है. वहीं गणेश प्रतिमाओं की स्थापना करने वाली कमेटियों ने भी व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं. 27 अगस्त से प्रारंभ होने वाले गणेश उत्सव के लिए झांकी पंडाल तैयार हो गए हैं.

छतरपुर में 120 स्थानों पर भगवान गणेश की स्थापना

शहर में महल परिसर, बस स्टैंड, चौबे कॉलोनी तिराहा और महाराष्ट्रियन मार्ग सहित करीब 120 स्थानों पर विभिन्न कमेटियों के द्वारा गणेश प्रतिमाएं विराजमान की जाती हैं. शासकीय, प्राइवेट कार्यालयों सहित लोग अपने घरों पर भी भगवान गणेश की प्रतिमाएं पूरी श्रद्धा भाव से स्थापित करते हैं.

वहीं, मूर्तिकारों ने 3 से 8 फीट तक ऊंची प्रतिमाएं बनाकर तैयार की हैं. तैयार की गई प्रतिमाओं में गणेश भगवान के अनेक रूप हैं. जिसमें बाल गणपति, तरुण गणपति, भक्त गणपति, वीर गणपति, शक्ति गणपति, सिद्धि गणपति, हेरम्ब गणपति और लक्ष्मी गणपति सहित अन्य स्वरूप है. कुछ में भगवान शिव या देवी पार्वती के स्वरूप भी दिखते हैं, वहीं किसी में नृत्य करते या ध्यानमग्न, यानमग्न दिखाते हुए मूर्तियां बनाई जा रही हैं.

मिट्टी के गणेश जी में धर्म और पर्यावरण का संगम

वहीं, छतरपुर जिले के जाने-माने अंतर्राष्ट्रीय कलाकार मूर्ति कार दिनेश शर्मा और संकट मोचन सेवा समिति के द्वारा इस बार एक नई पहल गणेश उत्सव के पहले शुरू की. जिसमें धर्म और पर्यावरण का अनूठा संगम दिखाई दिया है. समिति द्वारा एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जहां प्रतिभागियों को मिट्टी से गणेश जी की प्रतिमा बनाना सिखाया गया है.

इस कार्यशाला का उद्देश्य न केवल कला को बढ़ावा देना है, बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा करना है. इस महत्वपूर्ण कार्यशाला को संचालित करने की जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय कलाकार और चित्रकार दिनेश शर्मा निभा रहे हैं.

मिट्टी के गणेश जी बनाने की पहल

पारंपरिक रूप से प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नदी, तालाबों और झीलों में किया जाता रहा है, जिससे जलीय जीवन और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है. इसके विपरीत, मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पूरी तरह से प्राकृतिक और घुलनशील होती हैं. ये जल में आसानी से घुल जाती हैं और पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुंचातीं. बच्चों ने कलाकार दिनेश शर्मा के मार्गदर्शन में गणेश प्रतिमाओं को बनाये ओर अपने-अपने घर स्थापित करने के लिए ले गए.

जाने माने मूर्तिकार दिनेश शर्मा बताते हैं, ''मिट्टी के गणेश बनाना सिखाया जा रहा है. जिससे बच्चों में धर्म की जानकारी भी बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षित भी होगा. POP के गणपति मार्केट में मिलते हैं, लेकिन उनका विसर्जन नहीं होता, इसलिए मिट्टी के गणपति बनाना सिखाया जा रहा है.''

वहीं, संकट मोचन मंदिर समिति के सदस्य राजेन्द्र अग्रवाल बताते हैं, ''अभी तक घरों में POP की मूर्तियां विराजी जाती थी और उनके विसर्जन से जल सरंक्षण और पर्यावरण को नुकसान होता था. इसलिए मंदिर में गणेश प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण बच्चों को दिया जा रहा है.''

साभार  : इ टीवी भारत 

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