बांदा। “एक जनपद एक उत्पाद” योजना के अंतर्गत शामिल बांदा का प्रसिद्ध शजर पत्थर नोएडा में चल रहे इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। केन नदी में पाया जाने वाला यह पत्थर अपनी अनूठी बनावट और प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
फेयर में लगाए गए स्टॉल पर शजर से बनी कलाकृतियों ने आगंतुकों का मन मोह लिया। यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शजर पत्थर से बने राम मंदिर और अन्य कलाकृतियों का अवलोकन किया और इस अद्भुत कला की सराहना की।
शहर के दीनदयाल नगर निवासी शजर हस्तशिल्पी द्वारिका सोनी ने अपनी कलाकृतियों को प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि शजर पत्थर पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसका सौंदर्य किसी भी कृत्रिम डिजाइन से अलग और अद्वितीय है।
क्या है शजर पत्थर?
शजर पत्थर (डेंड्रिटिक एगेट) बांदा की केन नदी में मिलता है। इसके अंदर पेड़-पौधों और शाखाओं जैसी आकृतियां खुद-ब-खुद उभर आती हैं। यह आकृतियां प्राकृतिक रूप से मैंगनीज और लौह तत्वों के कारण बनती हैं। हर पत्थर का डिजाइन अलग होता है, इसी कारण इसे अद्वितीय और विशेष माना जाता है।
विशेषताएं और उपयोगिता
प्राकृतिक डिजाइन: किसी भी प्रकार की मशीन की मदद के बिना आकृतियां अपने आप बनती हैं।
अद्वितीयता: दो शजर पत्थर कभी भी एक जैसे नहीं होते।
नाम का अर्थ: ‘शजर’ शब्द फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है – पेड़।
इस पत्थर का उपयोग आभूषणों (अंगूठी, पेंडेंट, झुमके) और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है। बांदा के कारीगर इस पत्थर से अयोध्या के राम मंदिर और आगरा के ताजमहल जैसे स्थलों के छोटे-छोटे नमूने भी तैयार करते हैं, जो देश-विदेश के लोगों को बेहद आकर्षित करते हैं।

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