मध्य प्रदेश को आने वाले वर्षों में विकास की बड़ी सौगात मिलने वाली है। प्रदेश में अगले 4 सालों में 6 नए आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इनकी कुल लंबाई लगभग 3,368 किलोमीटर होगी और इन पर करीब 36,483 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस परियोजना से प्रदेश की आर्थिक गति तेज होगी और औद्योगिक निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
भोपाल से गुजरेंगे दो कॉरिडोर
प्रस्तावित 6 कॉरिडोर में से दो कॉरिडोर राजधानी भोपाल से होकर गुजरेंगे। इससे राजधानी को सीधे औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने का फायदा मिलेगा। इसके अलावा अन्य कॉरिडोर मालवा और बुंदेलखंड अंचल से होकर गुजरेंगे, जिससे इन पिछड़े क्षेत्रों को सबसे ज्यादा लाभ होने की उम्मीद है।
प्रदेश को 8 हिस्सों में बांटकर होगा विकास
योजना के अनुसार, कॉरिडोर का नेटवर्क पूरे मध्य प्रदेश को लगभग 8 हिस्सों में बांटेगा। इसका मकसद यह है कि सभी 55 जिलों को इन सड़कों से जोड़ा जा सके। इससे न केवल बड़े शहर बल्कि छोटे कस्बे और ग्रामीण इलाकों तक बेहतर सड़क संपर्क पहुंचेगा।
संयुक्त प्रयास से होगा निर्माण
इन कॉरिडोर का निर्माण लोक निर्माण विभाग (PWD), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) मिलकर करेंगे। इस परियोजना का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी 6 कॉरिडोर को वर्ष 2029 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूरा होने पर न केवल सड़क यातायात सुगम होगा बल्कि लॉजिस्टिक लागत भी कम होगी। उद्योगों, कृषि और पर्यटन को इससे सीधा लाभ मिलेगा।
मालवा और बुंदेलखंड को खास फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कॉरिडोर से सबसे ज्यादा फायदा मालवा और बुंदेलखंड क्षेत्र को होगा। अब तक विकास से वंचित इन इलाकों में बेहतर सड़क संपर्क से नए औद्योगिक और कृषि बाजार विकसित होंगे। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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