छतरपुर की बहुप्रतीक्षित ई-लाइब्रेरी अब छात्रों के लिए खोल दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 30 अगस्त को इसका भव्य शुभारंभ किया था। उद्घाटन समारोह में इसे युवाओं के लिए शिक्षा और तकनीक का नया द्वार बताया गया था। लेकिन हकीकत यह रही कि उद्घाटन के बाद करीब चार हफ्ते तक यहां ताले लटके रहे।
5 करोड़ की लागत से तैयार आधुनिक भवन
नीति आयोग की आकांक्षी जिला योजना के तहत 5 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई कॉलोनी परिसर में इस लाइब्रेरी का निर्माण हुआ है। वातानुकूलित हॉल, कंप्यूटर लैब, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई और डिजिटल कैटलॉग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ लाइब्रेरी नहीं बल्कि डिजिटल लर्निंग और स्किल डेवलपमेंट का भी केंद्र बनेगी।
उद्घाटन के बाद क्यों रहे ताले?
शानदार मंच, नेताओं के भाषण और बड़ी भीड़ के बाद छात्रों ने इसे शहर की सबसे बड़ी शैक्षणिक सौगात माना था। लेकिन पंजीयन और स्टाफ नियुक्ति की धीमी प्रक्रिया सबसे बड़ी अड़चन बनी। नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार रजिस्ट्रेशन और नियुक्ति पूरी करने में अपेक्षा से अधिक समय लग गया, जिस वजह से देरी हुई।
सीमित संसाधनों के साथ हुई शुरुआत
गुरुवार को जब आखिरकार लाइब्रेरी खोली गई, तो वहां केवल सात छात्र पहुंचे। छात्रों ने डिजिटल टेबल और इंटरनेट सुविधा का उपयोग किया, लेकिन किताबों का सीमित संग्रह उनकी सबसे बड़ी शिकायत रहा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं ने जल्द से जल्द पाठ्य सामग्री और रेफरेंस बुक्स उपलब्ध कराने की मांग की।
प्रशासन का दावा: सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ेंगी
नगरपालिका और जिला प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की गई है। आने वाले महीनों में नई किताबों की खेप मंगाई जाएगी। साथ ही छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन और ऑनलाइन कोर्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
छात्रों को उम्मीद है कि यह ई-लाइब्रेरी सिर्फ दिखावे की परियोजना न रहकर, सच में पढ़ाई और भविष्य निर्माण का मजबूत आधार बनेगी।

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