चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में रविवार और सोमवार की रात शरद पूर्णिमा पर्व पर धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। जिलेभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में स्नान कर भगवान कामदनाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की परिक्रमा लगाई। घाटों, मठों और मंदिरों में दिनभर भजन, कीर्तन और आरती की गूंज बनी रही।
चांदनी रात में अमृत तुल्य खीर का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दिन की चांदनी अमृत समान होती है, जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध करती है। इसी श्रद्धा के साथ भक्तों ने चांद की रोशनी में खीर तैयार कर खुले आसमान के नीचे रखी, ताकि उस पर ओस की बूंदें पड़ें — जिन्हें अमृत का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक नगरी में दो दिनों तक रही रौनक
इस बार शरद पूर्णिमा पर्व दो दिनों तक मनाया जा रहा है। पहले दिन ही रामघाट, कामदगिरि, सती अनुसूया और हनुमान धारा जैसे प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में सजावट, दीपों की लौ और भक्ति संगीत ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आलोक से भर दिया।
स्वास्थ्य लाभ की परंपरा भी जुड़ी
चित्रकूट में हर वर्ष इस पर्व पर आने वाले कई श्रद्धालु पारंपरिक रूप से खीर में आयुर्वेदिक औषधियां मिलाकर सेवन करते हैं। माना जाता है कि इससे शरीर को रोगों से मुक्ति और मन को शांति मिलती है। इस कारण कई श्रद्धालु दूरदराज के जिलों से यहां पहुंचते हैं और इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनते हैं।
श्रद्धा, आस्था और परंपरा का संगम
रात भर मंदाकिनी घाटों पर भक्तों की भीड़ लगी रही। चांद की दूधिया रोशनी में रामघाट का दृश्य ऐसा लग रहा था मानो पूरी नगरी आस्था के अमृत में नहाई हुई हो।

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