बुंदेलखंड से इस साल मानसून की विदाई हो चुकी है। झांसी जिले में पूरे सीजन में करीब 690 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि औसत आंकड़ा 738.8 मिलीमीटर है। यानी झांसी इस बार भी लगभग 48 मिलीमीटर बारिश से पीछे रह गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून सामान्य अवधि से एक सप्ताह अधिक सक्रिय रहा, लेकिन अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी।
जून-जुलाई में अच्छी शुरुआत, फिर थम गई रफ्तार
मानसूनी सीजन की शुरुआत में झांसी ने राहत की सांस ली थी। जून और जुलाई में कई बार झमाझम बारिश हुई, जिससे उम्मीद थी कि जिला इस बार औसत आंकड़ा पार कर लेगा। मगर अगस्त से बारिश की रफ्तार धीमी पड़ गई और सितंबर में लगभग ठहर सी गई। नतीजा यह हुआ कि मानसून की विदाई के साथ ही झांसी फिर से सूखे जैसी स्थिति में पहुंच गया।
सदर तहसील में सबसे ज्यादा बारिश
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सदर तहसील में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। वहीं अन्य इलाकों में पानी की मात्रा औसत से काफी कम रही। मौसम विभाग का कहना है कि ओडिशा में बना चक्रवात आने वाले दिनों में असर डाल सकता है, लेकिन बुंदेलखंड से मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है।
बारह साल से नहीं छुआ औसत का आंकड़ा
झांसी लगातार बारहवें साल भी औसत बारिश के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका है। वर्ष 2013 आखिरी बार था जब जिले में औसत से अधिक वर्षा हुई थी। पिछले एक दशक में तीन बार तो 500 मिलीमीटर से भी कम पानी गिरा। अधिकतर वर्षों में यह आंकड़ा 600 से 700 मिलीमीटर के बीच ही सिमटता रहा।
शुरुआती महीनों में उम्मीदें जगी थीं, लेकिन मानसून की रफ्तार कमजोर पड़ने से झांसी फिर निराश रह गया। अब जिले की नजर अगले मानसूनी सीजन पर है।

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