चित्रकूट। अगर आप प्रकृति और जंगल की खूबसूरती के दीवाने हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व रविवार से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। अब सैलानी यहां बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को नजदीक से देखने का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे।
हरे-भरे जंगलों में शुरू हुआ नया ईको-पर्यटन सत्र
मानिकपुर पाठा क्षेत्र स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व में ईको-पर्यटन सत्र 2025-26 की औपचारिक शुरुआत की गई। बारिश के बाद रिजर्व का घना जंगल फिर से हरा-भरा और जीवंत हो उठा है, जो अब सैलानियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रवेश द्वार को नया रूप दिया गया है, जिससे पर्यटक का अनुभव और भी आकर्षक बनेगा।
30 किलोमीटर की सफारी यात्रा में मिलेगा जंगल का रोमांच
रानीपुर टाइगर रिजर्व में आने वाले पर्यटक लगभग 30 किलोमीटर लंबी सफारी यात्रा का आनंद उठा सकेंगे। इस दौरान वे टाइगर रिजर्व के भीतर बसे प्राकृतिक जंगलों में बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण और अन्य वन्यजीवों को देख पाएंगे। इस सफर के दौरान प्रकृति की नीरवता और जंगल की सरसराहट पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव देगी।
पर्यटकों के लिए शुल्क और सुविधाएं
भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹80 और 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए ₹25 निर्धारित किया गया है। विदेशी सैलानियों को ₹1000 का टिकट लेना होगा।
जिप्सी सवारी शुल्क: भारतीयों के लिए ₹2500, विदेशियों के लिए ₹2500
कैमरा शुल्क: भारतीयों के लिए ₹450, विदेशियों के लिए ₹1800
कॉटेज ठहराव शुल्क: भारतीयों के लिए ₹3000, विदेशियों के लिए ₹6000
टाइगर रिजर्व परिसर में चार नए कॉटेज भी बनाए गए हैं, जहां सैलानी ठहरकर जंगल की प्राकृतिक छटा का आनंद ले सकेंगे।
ईको-टूरिज्म से बढ़ेगा रोजगार
रानीपुर टाइगर रिजर्व के खुलने से न सिर्फ पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सफारी वाहनों और पर्यटक सेवाओं के संचालन से आसपास के ग्रामीणों को आय का नया स्रोत मिलेगा।
रानीपुर टाइगर रिजर्व, बुंदेलखंड क्षेत्र का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जो प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता से भरपूर है। यह जगह न सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों बल्कि रोमांच और शांति की तलाश करने वालों के लिए भी एक बेहतरीन गंतव्य बनती जा रही है।

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