Chitrakoot : भक्ति और प्रेम से सराबोर भरत यात्रा का भव्य स्वागत

चित्रकूट। प्रभु श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट आज भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दी। अयोध्या से चली भरत यात्रा के आगमन पर पूरे क्षेत्र में “जय श्रीराम” के जयकारे गूंज उठे। यह यात्रा पिछले पांच दशकों से निरंतर आयोजित की जा रही है और इस बार भी श्रद्धा और उल्लास का वही अद्भुत नजारा देखने को मिला।

अयोध्या से चली यात्रा पहुंची चित्रकूट

अयोध्या से प्रारंभ हुई यह यात्रा सैकड़ों साधु-संतों और रामभक्तों के साथ चित्रकूट पहुंची। घाटों से लेकर भरत मिलाप मंदिर तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रास्ते में फूलों से सजी झांकियां, भजन-कीर्तन और शंख-घंटों की ध्वनि से पूरी तपोस्थली गूंजती रही। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया।

भरत-राम के मिलन की स्मृति में होती है यात्रा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वनवास काल में जब भगवान श्रीराम चित्रकूट में निवास कर रहे थे, तब उनके छोटे भाई भरत उन्हें अयोध्या लौटने के लिए मनाने यहां आए थे। दोनों भाइयों का यह मिलन प्रेम और त्याग का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। कहा जाता है कि उस भावनात्मक क्षण को देखकर चट्टानें तक पिघल गई थीं। यही स्थान आज प्रसिद्ध भरत मिलाप मंदिर के रूप में जाना जाता है।

आध्यात्मिक एकता की प्रतीक परंपरा

पिछले लगभग 50 वर्षों से यह यात्रा अयोध्या और चित्रकूट के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। यात्रा के दौरान भक्त भरत जी का स्वरूप धारण कर प्रभु श्रीराम से प्रतीकात्मक मिलन करते हैं। यह दृश्य देखकर भक्तों की आंखें भावनाओं से भर उठती हैं।

कामदगिरि परिक्रमा और मंदाकिनी आरती के साथ समापन

भरत मिलाप मंदिर में प्रतीकात्मक मिलन के बाद यात्रा कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करती है और मां मंदाकिनी नदी की आरती के साथ भक्ति भाव से सम्पन्न होती है। इस पावन अवसर पर पूरा चित्रकूट भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिकता के रंग में रंगा नजर आया।

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