डोंगराखुर्द क्षेत्र के कस्बा नाराहट में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। बीते तीन सप्ताह से कस्बे में नलों से पानी नहीं आ रहा है। बिजली की कम वोल्टेज की समस्या के कारण जल आपूर्ति व्यवस्था ठप पड़ी है। हालात यह हैं कि लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हैंडपंप और कुओं पर निर्भर होना पड़ रहा है।
पानी की कमी के चलते कस्बे में परेशानी का माहौल है। सुबह होते ही लोग पानी भरने के लिए घरों से निकल पड़ते हैं। हैंडपंपों पर भीड़ लग रही है और लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
हर घर जल योजना पर लगा ब्रेक
कस्बे में पहले हर घर जल योजना के तहत घर-घर नलों से पानी पहुंचाया जा रहा था। इस सुविधा से लोगों को काफी राहत मिल रही थी। लेकिन पिछले तीन सप्ताह से यह व्यवस्था पूरी तरह बंद है। नलों से पानी न आने के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। कई परिवार रोजाना तय समय पर नलों के पास बर्तन लेकर बैठ जाते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि शायद आज पानी आ जाए। काफी देर तक इंतजार के बाद भी जब नल सूखे रहते हैं, तो लोग निराश होकर वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करते हैं।
हैंडपंप और कुओं पर बढ़ा दबाव
नलों से पानी न मिलने के कारण हैंडपंप और कुओं पर निर्भरता बढ़ गई है। इससे इन जल स्रोतों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह पानी भरने को लेकर आपसी बहस तक की स्थिति बन रही है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
समाधान की प्रतीक्षा
स्थानीय लोग पेयजल आपूर्ति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं। लोग चाहते हैं कि बिजली की समस्या को दूर कर जल आपूर्ति को फिर से चालू किया जाए। कुल मिलाकर, नाराहट कस्बा इस समय गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। लोगों की निगाहें प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं, ताकि उन्हें फिर से नलों से साफ पानी मिल सके और रोजमर्रा की मुश्किलें कम हो सकें।

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