बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर इतिहास और संस्कृति के रंगों से सराबोर होने जा रही है। महाराजा खेतसिंह खंगार की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाला गढ़कुंडार महोत्सव क्षेत्र में उत्साह का केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
संस्कृति और परंपरा का जीवंत मंच
गढ़कुंडार महोत्सव बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह आयोजन जुझौतिखण्ड संस्कृति के जनक और वीर योद्धा महाराजा खेतसिंह खंगार की स्मृति में हर वर्ष आयोजित किया जाता है। गढ़कुंडार, खंगार क्षत्रिय समाज का ऐतिहासिक तीर्थ स्थल माना जाता है और समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है।
शोभायात्रा से होगा शुभारंभ
महोत्सव के पहले दिन महाराजा खेतसिंह खंगार की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर गजानन माता के मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों से समाजजन और श्रद्धालु शामिल होंगे। इस दौरान गढ़कुंडार का वातावरण भक्ति, परंपरा और उल्लास से भर जाएगा।
लोकसंस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां
तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिदिन निशुल्क भंडारे का आयोजन किया जाएगा। शाम के समय संस्कृति विभाग की ओर से लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें विभिन्न प्रदेशों की झलक देखने को मिलेगी। यह मंच कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर देगा और दर्शकों को सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ देगा।
शौर्य और इतिहास की गाथा
इतिहास में महाराजा खेतसिंह खंगार को एक साहसी और कुशल शासक के रूप में जाना जाता है। वे पृथ्वीराज चौहान के निकट सहयोगी और विश्वस्त योद्धा रहे। गढ़कुंडार दुर्ग उनकी वीरता और स्थापत्य कला का प्रतीक है, जो आज भी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
उत्साह और तैयारियां चरम पर
प्रशासन के अनुसार, महोत्सव को लेकर स्थानीय स्तर पर खासा उत्साह है। सुरक्षा, व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर सभी तैयारियां की जा रही हैं। गढ़कुंडार महोत्सव एक बार फिर इतिहास, आस्था और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने जा रहा है।

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