मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का सागर संभाग अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लंबे समय से जल संकट से जूझता रहा है। यहां की पथरीली जमीन और मिश्रित जलवायु के चलते लोग नलकूप, तालाब और कुओं के पानी पर निर्भर हैं। यही पानी अब लोगों की सेहत, खासकर किडनी पर भारी पड़ रहा है।
न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक, सागर संभाग में पिछले पांच वर्षों में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है। सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में संभाग के करीब पांच जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां आने वाले किडनी फेलियर के 10 में से लगभग 7 मरीज दमोह जिले के नरसिंहगढ़ और पथरिया क्षेत्र से होते हैं।
बीएमसी की ओपीडी के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 7000 से 8000 मरीज किडनी से जुड़ी समस्याओं के साथ यहां पहुंचते हैं। इनमें से 1500 से 2000 मरीज क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की गंभीर स्थिति में होते हैं, जिन्हें जीवित रहने के लिए नियमित डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि बीएमसी सहित पूरे संभाग के सरकारी अस्पतालों में एक भी नेफ्रोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को भोपाल, इंदौर या जबलपुर रेफर करना पड़ता है।
हालांकि, सागर में एक निजी अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध है। यहां के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विकास गुप्ता के अनुसार, दो साल पहले जहां लगभग 200 मरीजों का डायलिसिस होता था, वहीं अब हर महीने 950 से अधिक मरीज डायलिसिस करवा रहे हैं। अब तक यहां 35 किडनी ट्रांसप्लांट भी किए जा चुके हैं।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, किडनी रोग बढ़ने के प्रमुख कारणों में तेजी से बढ़ता शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी में पथरी शामिल हैं। इसके अलावा लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण भी ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं, जिससे समय पर इलाज संभव हो पा रहा है।
बीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र अहिरवार बताते हैं कि दमोह के कुछ क्षेत्रों के पानी में फ्लोराइड और भारी तत्वों की अधिकता है, जो पहले किडनी में पथरी बनाते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर किडनी फेलियर का कारण बन जाते हैं। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का लगातार सेवन भी किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चेहरे या पैरों में सूजन, भूख न लगना, नींद न आना और लगातार कमजोरी महसूस होना किडनी रोग के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी है।

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