बुंदेलखंड के जंगलों में इन दिनों महुआ के फूलों की खुशबू के साथ ग्रामीणों की आय भी बढ़ रही है। छतरपुर जिले के बक्सवाहा और बिजावर क्षेत्र के जंगलों में महुआ के फूलों को ‘पीला सोना’ कहा जा रहा है, क्योंकि इससे बिना किसी लागत के ग्रामीणों को अच्छी कमाई हो रही है।
अप्रैल महीने में महुआ के फूलों की तुड़ाई बड़े पैमाने पर की जाती है, जिससे गांव के लोगों को रोजगार का एक बड़ा जरिया मिल जाता है। ग्रामीण सुबह-सुबह जंगलों में जाकर फूल इकट्ठा करते हैं और फिर इन्हें बाजार में बेचकर आय अर्जित करते हैं।
महुआ केवल आमदनी का साधन ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की पारंपरिक जीवनशैली और संस्कृति का भी अहम हिस्सा है। इन फूलों का उपयोग खाद्य पदार्थों और अन्य उत्पादों में भी किया जाता है, जिससे इनकी मांग बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर यह कारोबार करोड़ों रुपए तक पहुंच रहा है, जिससे वन क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका मजबूत हो रही है। खास बात यह है कि इसमें किसी तरह की खेती या निवेश की जरूरत नहीं होती, जिससे यह गरीब और आदिवासी परिवारों के लिए खास लाभकारी साबित हो रहा है।

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