बुंदेलखंड में खनिजों की अपार संभावनाएं, जीएसआई की कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने किया मंथन

Scientists discussing mineral potential of Bundelkhand during GSI workshop on rare earth elements.



भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने सोमवार को लखनऊ के अलीगंज स्थित अपने परिसर में "बुंदेलखंड में क्रेटॉन की खनिज संभावनाएं" विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने बुंदेलखंड क्षेत्र में मौजूद खनिज संपदा की अपार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की और इसे देश की खनिज नीति के लिए एक नया केंद्र बताया। कार्यशाला का मुख्य फोकस "क्रिटिकल मिनरल्स" (दुर्लभ और महत्वपूर्ण खनिज) पर रहा, जो आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।


कार्यशाला का शुभारंभ जीएसआई के महानिदेशक असित साहा ने वर्चुअल माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का भू-भाग भूवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यधिक जटिल है, लेकिन यही जटिलता यहां खनिजों की विविधता और बहुतायत का कारण भी है। उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में जिस तरह से खनिजों के संकेत मिले हैं, वह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।" उन्होंने जीएसआई की टीमों द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना की और भविष्य में और अधिक संसाधन जुटाने का आश्वासन दिया।


कार्यशाला में जीएसआई के अपर महानिदेशक (एडीजी) जोयेश बागची ने कहा कि बुंदेलखंड क्रेटॉन (प्राचीन भू-भाग) दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements - REE) के लिए अत्यधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में वैनेडियम, जिरकोनियम, पोटाश, लिथियम, और बेस मेटल्स (जैसे तांबा, जस्ता) के बड़े भंडार होने की संभावना है। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोन और रक्षा उपकरणों में किया जाता है। भारत जैसे तेजी से विकास कर रहे देश के लिए इन खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।


जीएसआई के उत्तरी क्षेत्र के विभागाध्यक्ष राजिंदर कुमार ने इस अवसर पर उत्तरी क्षेत्र की हाल की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जीएसआई लगातार बुंदेलखंड क्षेत्र में भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और भू-रासायनिक जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में किए गए अध्ययनों में ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और जालौन जिलों में सोने, चांदी, तांबा, सीसा, जस्ता और यूरेनियम जैसे खनिजों के भी शक्तिशाली संकेत मिले हैं। विशेष रूप से ललितपुर जिले में सोने और लौह अयस्क की खोज के लिए ड्रिलिंग का काम तेजी से चल रहा है। पिछले दो दशकों से वैज्ञानिक इस क्षेत्र में हीलियम और पेट्रोलियम गैस की खोज में भी जुटे हुए हैं।


कार्यशाला के दौरान हिमाचल प्रदेश की खनिज संभावनाओं पर आधारित एक महत्वपूर्ण प्रकाशन का विमोचन भी किया गया, हालांकि चर्चा का केंद्र बुंदेलखंड ही रहा।


बुंदेलखंड को लंबे समय से सूखाग्रस्त और विकास से वंचित क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र की असली ताकत उसकी धरती के नीचे छिपी है। जीएसआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र प्राचीन चट्टानों (क्रेटॉन) से बना है, जो आमतौर पर खनिजों से भरपूर होते हैं। यदि ये खनिज भंडार सही साबित होते हैं, तो यह क्षेत्र न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के भी अपार अवसर पैदा करेगा।


बुंदेलखंड का भूगर्भीय इतिहास अरबों साल पुराना है, और यह क्षेत्र कभी समुद्र का हिस्सा था। समय के साथ, भू-गर्भीय हलचलों ने यहां विभिन्न प्रकार के खनिजों को जन्म दिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यहां केवल सतही स्तर का सर्वे हुआ है, और जैसे-जैसे गहरी खुदाई होगी, नए-नए खनिजों के भंडार मिलते जाएंगे। जीएसआई की योजना अगले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अन्वेषण अभियान चलाने की है।


यह कार्यशाला उस समय आयोजित की गई है जब भारत सरकार "क्रिटिकल मिनरल्स" के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर जोर दे रही है। बुंदेलखंड से इन खनिजों की प्राप्ति आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की इस कार्यशाला ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बुंदेलखंड की धरती सिर्फ संघर्षों की नहीं, बल्कि अपार संभावनाओं की भी है। अब आवश्यकता है कि सरकार और वैज्ञानिक संस्थान मिलकर इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलें, ताकि यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके और देश की खनिज जरूरतों को पूरा करने में अपना योगदान दे सके।

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