पहले सिमरिया के निवास प्रमाण पत्र पर हुई थी अपात्र, बाद में पांडाझिर के प्रमाण पत्र से मिली पात्रता
बड़ामलहरा। महिला एवं बाल विकास विभाग परियोजना क्रमांक-1 के अंतर्गत पांडाझिर आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका पद की भर्ती को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पहले अपात्र घोषित की गई एक महिला को बाद में दूसरे निवास प्रमाण पत्र के आधार पर पात्र मानते हुए भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया। मामले में परियोजना अधिकारी सीमा पटेल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पहले सिमरिया का प्रमाण पत्र लगाने पर हुई थी अपात्र
जानकारी के अनुसार गीता आदिवासी पत्नी संजू आदिवासी ने पांडाझिर आंगनबाड़ी केंद्र में रिक्त सहायिका पद के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ उन्होंने घुवारा तहसील के ग्राम सिमरिया का निवास प्रमाण पत्र लगाया था।
बताया गया कि 7 अगस्त 2025 को छानबीन समिति ने प्राप्त सभी नौ आवेदनों की जांच की थी। जांच के दौरान गीता आदिवासी को पांडाझिर की निवासी नहीं पाए जाने पर अपात्र घोषित कर दिया गया था। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज परियोजना कार्यालय में जमा हैं।
अप्रैल 2026 में लगाया पांडाझिर का नया प्रमाण पत्र
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इसके बाद अप्रैल 2026 में उसी महिला की ओर से बड़ामलहरा तहसील के ग्राम पांडाझिर का नया निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर उसे पात्र मानते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि महिला का विवाह सिमरिया गांव में हुआ है, जबकि उसका मायका पांडाझिर में बताया जा रहा है। ऐसे में पहले सिमरिया का निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर अपात्र घोषित होने और बाद में पांडाझिर का प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुराने दस्तावेज मौजूद थे तो दोबारा जांच क्यों नहीं?
मामले में शिकायतकर्ताओं ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि जब पूर्व आवेदन में प्रस्तुत सिमरिया का निवास प्रमाण पत्र और अपात्रता से संबंधित दस्तावेज परियोजना कार्यालय में मौजूद थे, तो नए प्रमाण पत्र के आधार पर पात्रता तय करते समय पुराने रिकॉर्ड का मिलान क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि दोनों निवास प्रमाण पत्रों की परिस्थितियों में क्या अंतर है तथा भर्ती के नियमों के तहत कौन-सा प्रमाण पत्र मान्य है।
16 मई को भी उठ चुका है मामला
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस मामले को लेकर 16 मई 2026 को भी समाचार प्रकाशित हुआ था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अब उन्होंने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले के दस्तावेजों की जांच कराने, भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करने और जांच में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
नोट: महिला को अपात्र/पात्र किए जाने और परियोजना अधिकारी की भूमिका से जुड़े आरोप शिकायतकर्ताओं के हैं। अंतिम स्थिति संबंधित विभागीय जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।

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