झांसी में 50 लाख की रंगदारी और 45 हजार लूट का आरोप, भाजपा नेता आशीष उपाध्याय जेल भेजे गए

झांसी। झांसी में सट्टा सिंडिकेट के मामले में कार्रवाई के बाद भाजपा नेता आशीष उपाध्याय की मुश्किलें बढ़ गईं। उनके खिलाफ प्रेमनगर थाने में लूट, रंगदारी मांगने और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेजने का आदेश दिया गया। 



45 हजार रुपये लूटने और 50 लाख रंगदारी मांगने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, आवास विकास कॉलोनी निवासी ऊधम सिंह ने प्रेमनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 18 अप्रैल को वह बाइक से सामान खरीदने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान नैनागढ़ के पास कार सवार आशीष उपाध्याय, मंगलम दुबे और दो अन्य लोगों ने उन्हें रोक लिया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आशीष उपाध्याय ने लाइसेंसी पिस्टल दिखाकर धमकाया और 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। आरोप है कि इसके बाद उनकी जेब से 45 हजार रुपये निकाल लिए गए। मामले में जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

जमीन के लेनदेन से जुड़ा है विवाद

शिकायत में ऊधम सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में उन्होंने आशीष उपाध्याय और उनके भाई आलोक उपाध्याय के साथ जमीन का एग्रीमेंट किया था। आरोप है कि जमीन के प्लॉट काटकर बेचे गए और भुगतान के लिए दिए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए। इसी लेनदेन को लेकर विवाद होने की बात शिकायत में कही गई है।

प्रेमनगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर लूट, रंगदारी और धमकी समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए

मामले में अदालत ने आशीष उपाध्याय को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया। पुलिस ने लूट की रकम बरामद करने के लिए आगे रिमांड की तैयारी भी की। बाद में अदालत ने कथित लूटी गई रकम में से 25 हजार रुपये की बरामदगी के लिए छह घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड की अनुमति दी थी।

पुलिस के मुताबिक, आशीष ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया था कि 20 हजार रुपये उसने अपने साथी मंगलम दुबे को दिए और बाकी 25 हजार रुपये बूढ़ा रोड स्थित अपने भूसे वाले घर में रखे थे। ये पुलिस/अभियोजन पक्ष के दावे हैं; मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

सट्टा मामले के बाद बढ़ी मुश्किलें

आशीष उपाध्याय का नाम इससे पहले झांसी के कथित 100 करोड़ रुपये के ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट मामले में भी सामने आया था। उन्हें इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में अदालत से राहत मिलने पर रिहाई के तुरंत बाद प्रेमनगर पुलिस ने रंगदारी और लूट के मामले में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया था।

महत्वपूर्ण: ऊपर बताए गए लूट, रंगदारी और धमकी से जुड़े तथ्य पुलिस शिकायत, अभियोजन और मीडिया रिपोर्टों में दर्ज आरोपों पर आधारित हैं। इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध अपराध के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ