झांसी में JDA अधिकारी के विरोध में उतरे लोग, पितृ तर्पण और पिंडदान को लेकर मंदिर परिसर में बढ़ा विवाद

झांसी। पितृपक्ष के दौरान झांसी में मंदिर परिसर और अतिक्रमण से जुड़े मामले को लेकर विवाद सामने आया है। पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचे लोगों ने JDA की कार्रवाई और अधिकारियों के रवैये को लेकर विरोध जताया। मामला मंदिर परिसर से जुड़े अतिक्रमण और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा बताया जा रहा है।


पितृ तर्पण और पिंडदान के दौरान विरोध

पितृपक्ष के अवसर पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करने पहुंचते हैं। झांसी में भी पितृपक्ष के दौरान नदी, तालाब और अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग तर्पण करते हैं। हाल ही में पहुज नदी तट पर 878 परिवारों के पूर्वजों के लिए सामूहिक पिंड पूजन भी कराया गया था।

इसी बीच मंदिर परिसर से जुड़े विवाद में JDA अधिकारियों की मौजूदगी और कार्रवाई को लेकर लोगों में नाराजगी सामने आई। विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन और पितृ कर्म से जुड़ी गतिविधियों को लेकर प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मंदिर परिसर और अतिक्रमण का मामला

झांसी में मंदिर परिसरों से जुड़े अतिक्रमण और निर्माण के मामले पहले भी JDA की कार्रवाई के केंद्र में रहे हैं। गुसाईंपुरा स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर परिसर में बनी 26 दुकानों वाली मार्केट को लेकर JDA ने कार्रवाई की थी। अगस्त 2026 में प्राधिकरण ने मार्केट को सील किया था और बाद में सील के टूटने को लेकर भी विवाद सामने आया।

मंदिर समिति की ओर से लगातार मंदिर की भूमि और परिसर को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की जाती रही है। सितंबर में यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचा था। समिति ने मंदिर की भूमि और संपत्ति के अभिलेखीय जांच की मांग उठाई थी।

JDA की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

JDA झांसी शहर के नियोजित विकास, मास्टर प्लान के अनुसार निर्माण नियंत्रण और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने वाली प्रमुख संस्था है। प्राधिकरण की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उसका उद्देश्य शहर का नियोजित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।

हालांकि, धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों और संबंधित समितियों की आपत्तियां भी सामने आती रही हैं। ऐसे में पितृ तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक आयोजनों के बीच सामने आए इस विवाद ने प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच समन्वय की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

नोट: इस मामले में JDA और मंदिर पक्ष का आधिकारिक विस्तृत बयान सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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